Wednesday, 19 March 2014

राखी की लाज - ऋता

231

सबसे प्यारा

लगे इस जहाँ में

भाई हमारा ।

 230

स्नेह दर्शाता

रेशम राखी-धागा

रक्षा का वादा।

229

श्रावणी झड़ी

बहना ले के खड़ी

राखी की लड़ी।

228

रेशम-धागे

स्नेह-बंधन बने

टूट न पाए ।

227

राखी की लाज

सदा तुम निभाना

वादा दो आज ।

226

शुभ-आशीष

सदा तुम्हारे लिए

भाई मेरे ।

225

रक्षाबंधन

पर्व दिव्य-प्रेम का

बताने आता।

224

सजी थालियाँ

कुंकुमराखी संग

मिष्टान्न सजे ।

223

भइया आया 

श्रावणी पूर्णिमा को

उल्लास छाया ।

222

भाई हों सुखी

आशीर्वादों की झोली

बहनें भरें ।

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1 comment:

  1. Bahut badhiya di.. :) Log likhna bhi seekh jayenge.

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