433
उडी दुआएँ
सरहद पहुंची
माँ तपस्विनी।
432
दो दिल मिले
सरहद के पार
रिश्तों में ढले।
431
उन्मुक्त हवा
तोड़ती सरहदें
आर से पार।।।
430
दोनों फ़क़ीर
सरहद पर है
एक लकीर।
429
सरहद से
आ गया है सन्देश
प्रिया बावरी।
428
बिखेरे ज्योति
सरहद का दीप
दोनों ही ओर।
427
सूर्य रश्मियाँ
किसके रोके रुकें
एक तरफ।
426
चली बन्दूक
सरहद थर्राया
भरे ताबूत।
425
कंटीली बाड़
सरहद पे उगी
हठीली झाड़।
424
वीर जवान
सरहद के पार
दिए सबक।
उडी दुआएँ
सरहद पहुंची
माँ तपस्विनी।
432
दो दिल मिले
सरहद के पार
रिश्तों में ढले।
431
उन्मुक्त हवा
तोड़ती सरहदें
आर से पार।।।
430
दोनों फ़क़ीर
सरहद पर है
एक लकीर।
429
सरहद से
आ गया है सन्देश
प्रिया बावरी।
428
बिखेरे ज्योति
सरहद का दीप
दोनों ही ओर।
427
सूर्य रश्मियाँ
किसके रोके रुकें
एक तरफ।
426
चली बन्दूक
सरहद थर्राया
भरे ताबूत।
425
कंटीली बाड़
सरहद पे उगी
हठीली झाड़।
424
वीर जवान
सरहद के पार
दिए सबक।
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